ख्वाब में ही घर मेरा जन्नत बनाएं गौस ए पाक
ख्वाब में ही घर मेरा जन्नत बनाएं गौस ए पाक साथ में सरकार के तशरीफ लाएं गौस ए पाक मैं ये समझूंगा मुझे जन्नत का खाना मिल गया अपने लंगर अगर मुझको खिलाएं गौस ए पाक हो मुबारक जाने वालों उनसे कहना बस यही जल्द ही मुझको दरे अकदस दिखाएं गौस ए पाक मैं अगर दिल से पुकारूं तो मेरा ईमान है हो नहीं सकता कि मेरे घर न आएं गौस ए पाक ऐसा हो जाता किसी दिन आपके दरबार में में सुनाऊं मनकबत और मुस्कुराएं गौस ए पाक शान क्या होगी हबीब ए किबरिया की सोंचिए कुम बे इज़नी कहके मुर्दे को जिलाएं गौस ए पाक